Natash

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पुराना मकान

ये नया मकान है मेरा ।

लेकिन ,


मैं उस गांव के पुराने मकान के लिए मैं रोया बहुत हूँ 

थे नहीं वहाँ पर ये सब ऐश ओ आराम ,

थे नहीं वहाँ पर सभी ये लाइट ये बल्ब ये ए सी, तमाम ,

एक नीम का पेड़ और आम का पेड़ था बस आंगन में

एक कच्चा सा घर , और पौधों की कियारी थी बस आंगन में


मैं उस पुराने मकान की लिए रोया बहुत हूँ ।

वहाँ ए सी नहीं बस सोते थे नीम के नीचे

जब तमाम दोपहरी कटती थी बस पेड़ो की नीचे ,

याद आता है

माँ का बार बार पकड़ कर सुलाना

सबका एक साथ वो चारपाईयो को लगाना


और दादी का बार बार पिटने से बचाना ,

मैं उस पुराने मकान के लिए रोया बहुत हूँ ।


वो लैंप की रौशनी , वो रात में जगमगाते जुगनू

वो बारिश का पानी, वो कागज़ की नाव का बनाना

वो नाव की रेस , वो पतलाने के नीचे नहाना

वो नीम की निबोली वो चिडयों का चहचहाना ,

वो गुलेल का चलाना, और वो पिटाई खाना

मैं उस पुराने मकान की लिए रोया बहुत हूँ ।



छत टपकती थी फिर भी आजाती थी नींद ,

मैं उस पुराने मकान के लिए रोया बहुत हूँ 


नतश 

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17 Comments

Renu

04-Sep-2023 11:49 AM

जहा की यादों में सुकून हो, वो भूले नहीं भुलाई जाती हैं!!

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Woow बहुत ही खूबसूरत सृजन और भावनात्मक अभिव्यक्ति

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Pinku

22-Jun-2022 07:02 AM

Vaakai behad behtreen likha h aapne👌👌 Thanku 🥰 jisne hme aapke kavita share ki

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